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अहिल्याबाई होल्कर और गौमाता की अनसुनी कहानी।

गौमाता साक्षात दया और ममता की प्रतिमूर्ति है ।सनातन धर्म में गाय को पशु नहीं माता का दर्जा दिया गया है और उसे हिंदू जन गौमाता भी कहते हैं। गाय की ममता दया के उदाहरण हमारे इतिहास में भरे पड़े हैं ।उनके उदाहरणों की कमी नहीं है पर हम उनमें से एक प्रसिद्ध कहानी प्रस्तुत करना चाह रहे हैं । मालवा की महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर को कौन नहीं जानता?वह न्याय प्रिय महारानी थी। उन्हें बचपन से ही गाय माता से बहुत प्रेम था ।उन्हें गाय चराने का भी बहुत शौक था वह प्रतिदिन गाय माता को खूब लाड़ दुलार किया करती थी और उन्हें चराने जंगल ले जाती । उनकी सब व्यवस्था देखती थी। उनका ध्यान  इस ओर ही रहता था कि जल की ध्वनि किस ओर से आ रही है और अच्छी घास कहां है। जहां गाय अच्छा पानी पी और घास खा सकें। वे गाय के बछड़ों को गाय से अलग नहीं रखती थी। उनका मानना था कि गाय के बछड़े को गाय से अलग करना ठीक नहीं है। और इसीलिए वे उनके बच्चों को भी साथ ले जाती थी। जब बछड़े गाय का दूध पीते जाते थे  गौ माता को कष्ट होने लगता था तब अहिल्याबाई  बछड़ों को डांट लगाती थी कि अब माता को कष्ट हो रहा है तब वह ...

दिखाऊं कोनी लाडलो नजर लग जाए भजन।

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  दिखाऊं कोनी लाडलो नजर लग जाए भजन नजर लग जाय रे,जुलम होय जाय -2 दिखाऊं कोनी लाड़लो,नजर लग जाय| नजर लग जाए रे,​ जुलम होय जाय || -2 🌸🌸🌸 विषधर तेरे गले में लिपटे, अंग वभूत रमाय, तेरे रूप को देखके जोगी, लाल मेरो डर जाये,  दिखाऊं कोनी लाड़लो,नजर लग जाय । नजर लग जाए रे,​ जुलम होय जाय ।। 🌸🌸🌸 ​सुन बातें मैया की भोले, मंद मंद मुस्काये, जिससे सारा जगत है डरता, उसको कौन डराये, दिखाऊं कोनी लाड़लो,नजर लग जाय । नजर लग जाए रे,​ जुलम होय जाय ।। 🌸🌸🌸 हीरा मोती लाल जवाहर जो चाहे ले जाए , पर जोगी नंदलाल के दर्शन कभी ना होने पाए, दिखाऊं कोनी लाड़लो,नजर लग जाय । नजर लग जाए रे,​ जुलम होय जाय ।। 🌸🌸🌸 ​हो उदास शिव भोले शम्बू, अपने कदम बढ़ाये, शिव को जाते देख कन्हैया, रो रो कर चिल्लाये, दिखाऊं कोनी लाड़लो,नजर लग जाय । नजर लग जाए रे,​ जुलम होय जाय ।। 🌸🌸🌸 ​नन्दलाल का रोना सुनकर, बोली मात यशोदा, नजर लगा दी मेरे लाल को, हाय हाय अब क्या होगा, दिखाऊं कोनी लाड़लो,नजर लग जाय । नजर लग जाए रे,​ जुलम होय जाय ।। 🌸🌸🌸 इतना सुनकर मात यशोदा, मोहन को ले आई, दर्शन किये हरी के शिव ने, राजू ख़ुशी मनाई,​ ...

आरती कुंजबिहारी की।

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" कुंजबिहारी जी की आरती " 🪔आरती कुंजबिहारी की , श्रीगिरधर कृष्ण मुरारी की ।।🌼🌼  गले में वैजंती माला, बजावे मुरली मधुर बाला ,   श्रवण में कुंडल जल काला ,नंद के आनंद नंदलाला   श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की , श्री गिरिधरकृष्ण मुरारी की ,  आरती कुंज बिहारी की , श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।।🌼🌼 गगन सम अंग कांति काली , राधिका चमक रही आली, लतन में ठाढ़े बनमाली , भ्रमर सी अलक , कस्तूरी तिलक ,  चंद्र सी झलक , ललित छवि श्यामा प्यारी की ,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ,आरती कुंज बिहारी की , श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।।🌼🌼 कनकमय मोर मुकुट बिलसेै , देवता दर्शन को तरसेैं गगन सों सुमन रास बरसेै ,  बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ,  ग्वालिनी संग , अतुल रति गोप कुमारी की ,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की , आरती कुंजबिहारी की , श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।।🌼🌼 जहां ते प्रकट भई गंगा , कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा, स्मरण ते होत मोह भंगा , बसी शिव शीश ,जटा के बीच ,  हरेै अघ कीच, चरण छवि श्री बनवारी की , श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ,आरती कुंजबिहारी की , श्री गिरिधर कृष्ण मु...